1.विष्णुसहस्त्रनाम 1. विश्वम
1.विष्णुसहस्त्रनाम 1. विश्वम
ईश्वर कौन है?
इस प्रश्न का उत्तर समझने समझाने के लिए इस समूह का उपयोग कर विष्णुसहस्त्रनाम में विष्णु के वर्णित 1000 नामों का मैं सहयोग लेना चाहता हूँ ताकि हम सब ये समझ सकें कि ईश्वर वही है जो हम अपने समस्त सद्गुणों के साथ हैं । यानी ईश्वर कोई पृथक सत्ता नहीं है बल्कि ईश्वर ईश्वरत्व का मूर्त नाम है, ऐसे गुणों का समग्र संग्रहण है जो हम सब में होते हीं होते हैं। जो अपने इन गुणों को जितना उभार पाता है वह उतनी मात्रा में ईश्वर को पहचान पाता है और जितना पहचान पाता है अपने सद्गुण आधारित कर्मों से उतना वह स्वयम ईश्वर होता है।
तो आइए हम विष्णु के एक एक नाम के सहारे समझें कि ईश्वर कौन है।
1.विश्वम
विष्णु ही संसार हैं। वे विश्व हैं, विश्व के रचयिता हैं और विश्व रचने के उपरांत उसी विश्व में समाहित हैं। इस प्रकार विश्व ही ब्रह्म स्वरूप है और ब्रह्म हीं विश्व स्वरूप भी है। इस प्रकार ईश्वर और विश्व दोनों ही एक हैं क्योंकि रचनाकार का वास अपनी रचना में है। सम्पूर्ण विश्व विष्णु की उपस्थिति का एक मूर्त स्वरूप है।
इस प्रकार इस विश्व में हमारी उपस्थिति निश्चित ही वंदनीय है और हमारा यह दायित्व है कि हम विश्व को उसकी सम्पूर्णता में ग्रहण कर उसके हितार्थ अपने कर्म करें। जब विश्व ही ब्रह्म है और ब्रह्म ही विश्व स्वरूप है तो फिर हम भी जो भी इस विश्व में हैं वे सभी ईश्वर के अंश हैं और ईश्वर हमारे अंशों की सम्पूर्ण अभिव्यक्ति है। इस लिए हम सभी का दायित्व है कि हम विश्व के प्रति पूरी जबाबदेही से अपने दायित्वों को पूरा करें।
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