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श्रीमद्भागवद्गीता: एक व्यवहारिक प्रशिक्षण अध्याय 3

                      पृष्ठभूमि महाभारत के युद्ध के पूर्व पांडवों ने अपना साम्राज्य कौरवों के हाथों गँवा दिया था। यूँ कहें कि करवों ने दुर्योधन के नेतृत्व में धृतराष्ट्र की मौन स्वीकृति से छल से पांडवों का साम्राज्य, उनका उस समय के अनुसार से प्रचलित कानूनी हक छीन लिया था, पांडवों की पत्नी का भरी सभा में घोर अपमान किया था, तथा पांडवों की छल से हत्या की कोशिश भी की थी। श्रीकृष्ण के सभी शांति प्रस्ताव विफल हो गए थे। तब पांडवों ने युद्ध का विकल्प चुना था। लेकिन युद्ध क्षेत्र में पहुँच कर पांडवों का सबसे प्रमुख योद्धा अर्जुन विषादग्रस्त हो गया। कारण? युद्ध क्षेत्र में जब अर्जुन ने देखा कि उसके पितामह, उसके गुरु, उसके कुलगुरु, उसके भाई एवम अन्य बंधु बाँधवगण, उसके मित्र खड़े हैं तो वो विचलित हो गया। ऐसा नहीं कि अर्जुन को प्रथम बार पता चला हो कि कौन कौन उसके कष्ट के कारण रहें हैं, कौन कौन उसके विरुद्ध युद्ध में उतरेंगे। लेकिन युद्धक्षेत्र में सभी विरोधियों को समवेत देख कर वो घबड़ा गया। उसकी घबड़ाहट पराजय के भय से नहीं थी। अर्जुन अपने युग के मह...

श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 3 पृष्ठभूमि

श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 3 :एक व्यवहारिक प्रशिक्षण: पृष्ठभूमि                       पृष्ठभूमि महाभारत के युद्ध के पूर्व पांडवों ने अपना साम्राज्य कौरवों के हाथों गँवा दिया था। यूँ कहें कि करवों ने दुर्योधन के नेतृत्व में धृतराष्ट्र की मौन स्वीकृति से छल से पांडवों का साम्राज्य, उनका उस समय के अनुसार से प्रचलित कानूनी हक छीन लिया था, पांडवों की पत्नी का भरी सभा में घोर अपमान किया था, तथा पांडवों की छल से हत्या की कोशिश भी की थी। श्रीकृष्ण के सभी शांति प्रस्ताव विफल हो गए थे। तब पांडवों के समक्ष युद्ध का विकल्प ही बच गया  था। लेकिन युद्ध क्षेत्र में पहुँच कर पांडवों का सबसे प्रमुख योद्धा अर्जुन विषादग्रस्त हो गया। कारण? युद्ध क्षेत्र में जब अर्जुन ने देखा कि उसके पितामह, उसके गुरु, उसके कुलगुरु, उसके भाई एवम अन्य बंधु बाँधवगण, उसके मित्र खड़े हैं तो वो विचलित हो गया। ऐसा नहीं कि अर्जुन को प्रथम बार पता चला हो कि कौन कौन उसके कष्ट के कारण रहें हैं, कौन कौन उसके विरुद्ध युद्ध में उतरेंगे। लेकिन युद्धक्षेत्र में सभी विरोधियों को समवे...

श्रीमद्भागवद्गीता -एक व्यवहारिक प्रशिक्षण अध्याय 2

Srimad Bhagavad Gita -A Practical Training -Chapter ------------------- ------------------------------                         background                        ------------ The practice of seeing one's own doubts through the guise of Arjuna's doubts in Shrimad Bhagwat Geeta --------------------------------------------------------- Interpretation----Rahul Ramya ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: After blowing the conch shell, before the actual battle, Arjuna wants to personally inspect the armies of both sides to assess himself for the war. Actually, when any sensible person wants to solve a problem, or whenever he wants to face a situation, what will he do first? First of all, he will examine every aspect of the problem, he will want to assess the strengths and weaknesses of each aspect. Only after that he will decide his strategy. Going...