विष्णुसहस्त्रनाम
ईश्वर कौन है? इस प्रश्न का उत्तर समझने समझाने के लिए विष्णुसहस्त्रनाम में विष्णु के वर्णित 1000 नामों का सहयोग ले सकते हैं ताकि हम सब ये समझ सकें कि ईश्वर वही है जो हम अपने समस्त सद्गुणों के साथ हैं । यानी ईश्वर कोई पृथक सत्ता नहीं है बल्कि ईश्वर ईश्वरत्व का मूर्त नाम है, ऐसे गुणों का समग्र संग्रहण है जो हम सब में होते हीं होते हैं। जो अपने इन गुणों को जितना उभार पाता है वह उतनी मात्रा में ईश्वर को पहचान पाता है और जितना पहचान पाता है अपने सद्गुण आधारित कर्मों से उतना वह स्वयम ईश्वर होता है। तो आइए हम विष्णु के एक एक नाम के सहारे समझें कि ईश्वर कौन है। 1.विष्णुसहस्त्रनाम श्लोक 1 1.विश्वम विष्णु ही संसार हैं। वे विश्व हैं, विश्व के रचयिता हैं और विश्व रचने के उपरांत उसी विश्व में समाहित हैं। इस प्रकार विश्व ही ब्रह्म स्वरूप है और ब्रह्म हीं विश्व स्वरूप भी है। इस प्रकार ईश्वर और विश्व दोनों ही एक हैं क्योंकि रचनाकार का वास अपनी रचना में है। सम्पूर्ण विश्व विष्णु की उपस्थिति का एक मूर्त स्वरूप ...