श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 15 श्लोक 6
श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 15 श्लोक 6
न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः।
न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः।
जिस परम पद को प्राप्त होकर मनुष्य लौटकर संसार में नहीं आते उस स्वयं प्रकाश परम पद को न सूर्य प्रकाशित कर सकता है, न चन्द्रमा और न अग्नि ही, वही मेरा परम धाम है।
इस प्रकार वैराग्य और समर्पण के मार्ग पर चलता हुआ व्यक्ति जिस स्थिति को प्राप्त करता है वही ईश्वरत्व है। यानी माया, मोह, इक्षा, द्वंद्व, को त्याग कर प्रेम और अध्यात्म के मार्ग चलने वाला व्यक्ति संसार के कर्म बन्धन से मुक्त होकर ईश्वरत्व यानी परम् पद को प्राप्त करता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि ईश्वर की प्राप्ति कँही बाहरी दुनिया में नहीं है और अति सरल भाषा में कहें तो यही की जिसने स्वयं के सत्य को पा लिया वही ईश्वर को पा लिया। यँहा सूर्य और चंद्रमा की स्थिति भी गौण है यानी इस स्थिति को किसी अन्य बाहरी तरीके से नहीं देखा जाना जा सकता है। एक ही मार्ग है जिसे कहा गया है।
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