श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 14 श्लोक 1 एवं 2
श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 14 श्लोक 1
श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 14 श्लोक 1
श्रीभगवानुवाच परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानं मानमुत्तमम्।
यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः॥ ।।1।।
श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 14, श्लोक 2
इदं ज्ञानमुपाश्रित्य मम साधर्म्यमागताः।
सर्गेऽपि नोपजायन्ते प्रलये न व्यथन्ति च॥ ।।2।।
श्री भगवान बोले- ज्ञानों में भी अतिउत्तम उस परम ज्ञान को मैं फिर कहूँगा, जिसको जानकर सब मुनिजन इस संसार से मुक्त होकर परम सिद्धि को प्राप्त हो गए हैं।
इस ज्ञान को आश्रय करके अर्थात धारण करके मेरे स्वरूप को प्राप्त हुए पुरुष सृष्टि के आदि में पुनः उत्पन्न नहीं होते और प्रलयकाल में भी व्याकुल नहीं होते।
मनुष्य के जीवन में परम् सिद्धि है उसका अपनी परम् चेतना को प्राप्त करना। परम् चेतना यानी अपनी आत्मा, अपने स्व को प्राप्त करना जो परमात्मा का ही स्वरूप है। मनुष्य की परम् चेतना यानी उसकी वह चेतना जो उसे अवगत कराती है कि वह परुष रूप में(पुरुष का अर्थ लिंग रूप में नहीं है बल्कि लिंग स्तर पर मर्द और औरत दोनों के लिए इस व्याख्या में पुरुष का ही उपयोग किया गया है) प्रकृति से कैसे भिन्न और स्वतंत्र है। इस पुरुष को ही क्षेत्रज्ञ भी कहा गया है जो क्षेत्र को जानता है। जब पुरुष प्रकृति में स्थित होकर भोक्ता बन जाता है तो पुरुष यानी चेतना पर प्रकृति का लेप चढ़ जाता है। किंतु जब पुरुष स्वयं को प्रकृति में रहते हुए उसके प्रभाव से मुक्त करता है तो द्रष्टा भाव से प्रकृति में अवस्थित होता है। यही शुद्ध पुरुष परमात्मा है, पुरुषोत्तम है जिसकी प्राप्ति ही, यानी प्रकृति में द्रष्टा भाव से अवस्थित होना ही सिद्धि की प्राप्ति है और अभी तक कर्म, ज्ञान, भक्ति के जो भी मार्ग बताए गए हैं वे सभी इसी सिद्धि की प्राप्ति के लिए हैं। सिद्धि की प्राप्ति का अर्थ है संसार में रहकर भी उसमें लिप्त नहीं होना। यही अवस्था अध्यात्म की अवस्था है जिसमें व्यक्ति स्व को जान पाता है। और चतुर्दश अध्याय पुनः इसी ज्ञान को बतलाता है।
इस ज्ञान को प्राप्त करने के उपरांत व्यक्ति को हर संशय , यँहा तक कि जन्म और मृत्यु से भी मुक्ति मिल जाती है। इस ज्ञान को समझने और आत्मसात करने से व्यक्ति की व्याकुलता समाप्त हो जाती है। किंतु इस ज्ञान को वही प्राप्त कर पाता है जो इस ज्ञान के प्रति अटूट श्रद्धा रखे और उसे विश्वास हो कि वह सदगुरु के मार्गदर्शन में सही मार्ग पर चल रहा है।
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