श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 10 श्लोक 39
श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 10 श्लोक 39
यच्चापि सर्वभूतानां बीजं तदहमर्जुन।
न तदस्ति विना यत्स्यान्मया भूतं चराचरम्॥ ।।39।।
और हे अर्जुन! जो सब भूतों की उत्पत्ति का कारण है, वह भी मैं ही हूँ, क्योंकि ऐसा चर और अचर कोई भी भूत नहीं है, जो मुझसे रहित हो। ।।39।।
78.जीवन की उत्पत्ति का स्रोत यानी बीज ईश्वर ही हैं । उनसे ही समस्त जीवन उत्पन्न होते हैं। इस स्रोत का कभी नाश नहीं होता है। सो जीवन का स्वरुप भले बदलता रहे जीवन तो हमेशा ही रहता है।
79.इस संसार में चर और अचर जो कुछ भी है वह सब ईश्वर के कारण है, उसकी विभूति है और उन सब में ईश्वर का वास है यानी ईश्वर हर जगह , हर स्वरूप में विद्यमान हैं।
Comments
Post a Comment