श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 10 श्लोक 27
श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 10 श्लोक 27
उच्चैःश्रवसमश्वानां विद्धि माममृतोद्धवम्।
एरावतं गजेन्द्राणां नराणां च नराधिपम्॥ ।।27।।
घोड़ों में अमृत के साथ उत्पन्न होने वाला उच्चैःश्रवा नामक घोड़ा, श्रेष्ठ हाथियों में ऐरावत नामक हाथी और मनुष्यों में राजा मुझको जान। ।।27।।
25. ईश्वर पशु, पक्षी, सजीव, निर्जीव सब में हैं और सर्व श्रेष्ठ उदाहरणों से हम इस तथ्य को समझते हैं। सो अश्वों में ईश्वर उच्चैःश्रवा अश्व ईश्वरीय गुणों की अभिव्यक्ति हैं।
26. और इसी प्रकार हाथियों में ऐरावत हाथी ईश्वरीय अभिव्यक्ति है।
27. मनुष्यों में जो व्यक्ति ईश्वरीय गुणों से परिपूर्ण, अन्य सभी प्राणियों का पोषण करने वाला और उनकी रक्षा करने वाला होता है अर्थात जो राजा होता है वही ईश्वरत्व से परिपूर्ण होता है।
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