श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 10 श्लोक 26
श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 10 श्लोक 26
अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः।
गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धानां कपिलो मुनिः॥ ।।26।।
मैं सब वृक्षों में पीपल का वृक्ष, देवर्षियों में नारद मुनि, गन्धर्वों में चित्ररथ और सिद्धों में कपिल मुनि हूँ। ।।26।।
21.ईश्वर तो हर जगह हैं और हर चीज में ईश्वर हैं। ईश्वरीय अभिव्यक्ति ही ईश्वर की विभूति है, सो इसे समझाने के लिए सर्वश्रेष्ठ का उदाहरण ही उपयुक्त है। इसीलिए ईश्वर वृक्षों में भी हैं और पीपल का वृक्ष अपने गुणों के माध्यम से ईश्वरीय विभूति को दर्शाता है।
22.इसीप्रकार दैवी गुणों के ऋषि नारद हैं जो ईश्वरीय विभूति के प्रतीक हैं।
23.सभी गंधर्वों में चित्ररथ सर्वश्रेष्ठ हैं और वे ईश्वर को अभिव्यक्त करता हैं।
24.सभी सिद्ध पुरुषों में यानी जिन्होंने ईश्वर को साक्षात अनुभव किया है अर्थात जिनमें ईश्वरीय गुण पूर्णता के साथ हैं उनमें ऋषि कपिल के रूप में ईश्वर अभिव्यक्त होते हैं।
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