श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 10 श्लोक 19

श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 10 श्लोक 19

श्रीभगवानुवाच

हन्त ते कथयिष्यामि दिव्या ह्यात्मविभूतयः।
प्राधान्यतः कुरुश्रेष्ठ नास्त्यन्तो विस्तरस्य मे॥ ।।19।।

श्री भगवान बोले- हे कुरुश्रेष्ठ! अब मैं जो मेरी दिव्य विभूतियाँ हैं, उनको तेरे लिए प्रधानता से कहूँगा; क्योंकि मेरे विस्तार का अंत नहीं है। ।।19।।

ईश्वर को समझने के लिए अनंत रास्ते हैं क्योंकि ईश्वर के लक्षणों , उनकी विभूतियों को शब्दों में बाँधना सम्भव नहीं है। किंतु ईश्वर को समझने के लिए कुछ लक्षणों को जो प्रमुख हैं उनको समझा जा सकता है। इन प्रधान विभूतियों के माध्यम से हम ईश्वरीय मार्ग पर बढ़ते हुए हम उनकी अनंत विभूतियों का अनुभव अवश्य ही कर सकते हैं।  सो हम आगे देखते हैं कि ईश्वर को समझने के लिए उनके किन प्रधान विभूतोयों पर केन्द्रित होना चाहिए। 

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