श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 7 श्लोक 26

श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 7 श्लोक 26

वेदाहं समतीतानि वर्तमानानि चार्जुन।
भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्चन॥ ।।26।।
हे अर्जुन! पूर्व में व्यतीत हुए और वर्तमान में स्थित तथा आगे होने वाले सब भूतों को मैं जानता हूँ, परन्तु मुझको कोई भी श्रद्धा-भक्तिरहित पुरुष नहीं जानता। ।।26।।

    ईश्वर तो सब कुछ जानता है, फिर चाहे वह अतीत हो, वर्तमान हो या भविष्य लेकिन बिना श्रद्धा और भक्ति के व्यक्ति ईश्वर को नहीं जान पाता है। जब तक बिना शर्त समर्पण न हो, जब तक बिना किसी कामना के समर्पण न हो, जब तक व्यक्ति के मन में अटूट भरोसा न हो तब तक उस व्यक्ति के लिए ईश्वर को जान समझ पाना सम्भव नहीं होता है। श्रद्धा है तभी ज्ञान है, बिना श्रद्धा के यदि हम आप कुछ जानते हैं तो फिर जो ज्ञान अल्पजीवी होता है, जल्द ही हम विस्मृत भी हो जाते हैं क्योंकि बिना श्रद्धा के हम ज्ञान के पथ का अनुसरण नहीं कर पाते और जब तक ईश्वरीय पथ का हम अनुसरण नहीं करते तब तक मात्र पढ़, सुनकर हम उस ज्ञान को नहीं पा सकते हैं।

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