8. विष्णुसहस्रनाम-8-भूतात्मा
8. विष्णुसहस्रनाम-8-भूतात्मा
ईश्वर सभी प्राणियों के अंदर बसने वाला उनकी आत्मा है। यह उनकी चेतना है। श्रीमद्भागवद्गीता में जड़ और चेतन के स्वरूप को समझाते हुए वर्णित है कि जब जड़ का यानी प्रकृति का संयोग चेतना से होता है तो जीव का आविर्भाव होता है। यानी बिना आत्मा के , बिना चेतना के तत्व मात्र जड़ हैं। बिना ईश्वरीय उपस्थिति के हम सभी मात्र निर्जीव यंत्र मात्र होते हैं।
यह सत्य हम सभी पर , हम सभी जीव धारियों पर समान रूप से लागू होता है। हम सभी स्वयम के अंदर ईश्वर को धारण करते हैं। अब हमें इसकी अनुभूति कितनी होती है यह हमारे अपने संस्कारों पर निर्भर करता है किंतु ईश्वरत्व तो समान भाव से सभी में विद्यमान है ही।
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