7. विष्णुसहस्रनाम-7-भावः
7. विष्णुसहस्रनाम-7-भावः
विष्णु ब्रह्मांड स्वरूप स्थित होते हैं। वे नित्य रूप होते हुए भी स्वतः ही अस्तित्व में होते हैं। ईश्वर का अस्तित्व किसी बाहरी कारक पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि ईश्वर तो स्वतः ही हैं।
यदि व्यक्ति खुद के सेल्फ को , अपनी आत्मा को समझ पाता है, उससे एकाकार हो पाता है तो वह समझ पाता है कि उसका अस्तिव सम्पूर्ण विस्तार का एक प्रतिरूप है , वह उस वृहत अस्तित्व से भिन्न नहीं है जो ईश्वर के रूप में हर जगह विद्यमान है।
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