श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 7 श्लोक 2
श्रीमद्भागवद्गीता अध्याय 7 श्लोक 2
ज्ञानं तेऽहं सविज्ञानमिदं वक्ष्याम्यशेषतः।
यज्ज्ञात्वा नेह भूयोऽन्यज्ज्ञातव्यमवशिष्यते॥ ।।2।।
मैं तेरे लिए इस विज्ञान सहित तत्व ज्ञान को सम्पूर्णतया कहूँगा, जिसको जानकर संसार में फिर और कुछ भी जानने योग्य शेष नहीं रह जाता है। ।।2।।
जब हम ईश्वर से असीम श्रद्धा के साथ और अतिशय प्रेम के साथ जुड़ जाते हैं तो हमें न केवल ईश्वरोय विभूतियों का ज्ञान मिलता है बल्कि उन विभूतियों को प्राप्त करने का प्रत्यक्ष मार्ग भी मिलता है जिसके अनुसार हमें उनकी प्रत्यक्ष अनुभूति भी होती है। हम सिर्फ ये नहीं जानते हैं कि ईश्वर क्या है , कौन है बल्कि हम उस ईश्वर को खुद के अंदर अनुभव भी करने लगते हैं। ईश्वरत्व की समझ प्राप्त करना जँहा ज्ञान है वंही उसकी अनुभूति कर लेना विशेष ज्ञान यानी विज्ञान है। जब हम ईश्वरत्व को समझ कर उसकी अनुभूति खुद के अंदर कर लेते हैं तो फिर जानने के लिए कुछ और शेष नहीं रह जाता है।
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