6.विष्णुसहस्रनाम-6-भूतभृत
6.विष्णुसहस्रनाम-6-भूतभृत
विष्णु ही सभी के पालनहार हैं, वही सभी का ख्याल भी रकहते हैं, सभी का पोषण भी करते हैं, सभी को पालते भी हैं और वे ये सब सत्वगुण में अवस्थित होकर करते हैं।
हम इस ईश्वरीय विभूति का प्रतिपल प्रत्यक्ष दर्शन भी करते हैं और इस विभूति को प्रत्येक व्यक्ति के अंदर पाते भी हैं। जब व्यक्ति योग की परम अवस्था प्राप्त करता है तो वह सभी चर अचर के अस्तित्व की रक्षा करने लगता है, उसे किसी से वैर नहीं होता है। बिना वैर भाव के योगी व्यक्ति सभी का समान भाव से ख्याल करता हुआ उनकी रक्षा करता है। उसके अंदर किसी भी तरह का शत्रु भाव किसी के प्रति नहीं होता है। वह व्यक्ति भी विष्णु की इस विभूति से अलंकृत हुआ होता है।
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