3. विष्णुसहस्रनाम- 3-वष्टकारः

विष्णुसहस्रनाम 3 वष्टकारः

3.वष्टकारः- योगमार्ग में जो नियत कर्म किये जाते हैं वे यज्ञ में  क्रियाएं होती हैं जिनको हम ईश्वर को समर्पित कर करते हैं। जिनको समर्पित कर हम यज्ञ कर्म करते हैं वही तो विष्णु है, ईश्वर हैं। योगमार्ग में नियत कर्म यज्ञ हैं अर्थात वे कर्म हैं जिनको हम उच्च आदर्शों के प्रति समर्पित हो कर किया करते हैं और उनमें सेवा का भाव होता है न कि उनको करने में अहंकार का कोई भाव आता है। यह समर्पण जिनके प्रति होता है वे विष्णु यानी ईश्वर हैं। जब हम योगमार्ग पर चलकर सेवा भाव से समर्पित होकर कर्म करते हैं तो जिनके प्रति हमारा निष्काम समर्पण है वही ईश्वर हैं, वही विष्णु हैं।

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